2122 1212 22
आपसी रंजिशें गुमान कई
लूट लेती सुकूं अमान कई/1/
एक चूल्हा उमीद से है फिर
होंगे इक घर के फिर मकान कई/2/
दरमियाँ फासलों ने कर डाले
खास रिश्ते लहु लुहान कई/3/
भागे खिडकी से ही निकल रिश्ते
देख हालात के ढलान कई/4/
बस तेरा जिक्र अब नही मिलता
यूँ है मुझमें तेरे निशान कई/5/
अपनी औकात का पता है हमें
हमने देखे हैं आसमान कई/6/
आग को आग से बुझाते है
शह्र में ऐसे हैं नदान कई/7/
दुनिया दारी हमें सिखाओ मत
देखे हैं हमने भी जहान कई/8/
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