Saturday, 23 July 2022

हर शख्स ही यहाँ पे सियासत से तंग है

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हर शख्स  ही  यहाँ पे    सियासत  से  तंग है 
फिरका परस्ती   झूठ से    नफरत  से  तंग है /1/

गठजोड़ जब से  जुल्म का  खादी से हो गया
अखबार   सुर्खियों  की     इबारत  से  तंग है /2/

महंगे  हुए हैं  आजकल    बाजार  इस कदर
पब्लिक  बदलते   दाम से   कीमत  से तंग है /3/

इंसानियत  की    कौम  नही है     ये  शुक्र है
वरना  तो  मुल्क   सिजदे इबादत   से तंग है/4/

फिल्में भी अब तो  हिन्दू मुसलमान  हो गयी
आम आदमी ये  मजहबी  फितरत से तंग है/5/

जिनके  लिए है   जंग     उन्ही को पता नही
दैरो हरम  भी  आपसी     हुज्जत  से तंग है/6/

खेमों में बंट चुकी है हर इक सोच आज की
हर  जिंदगी  नजरिये  से   नीयत  से  तंग है/7/

नादान  दिल  फरेब में  आ  जाता है  सहल 
हर शख्स दिल की चाह से हसरत से तंग है/8/

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