Saturday, 23 July 2022

तन्हाईयों का खौफ़ रहा इस कदर मुझे

221 2121 1221 212 
तन्हाईयों  का   खौफ़ रहा      इस कदर  मुझे
लगने लगा है  अपने ही घर  अब तो डर मुझे/1/

परछाईयों  से   रोज़  ही  लड़ता  झगड़ता हूँ 
होने  लगी है   खीज़     जरा   बात पर  मुझे/2/

दीवारें    चीखतीं हैं          दरो बाम  चीखते
खाने  को   दौड़ता  है   ये  सूना सा घर मुझे/3/

वो  जाने  वाला   ऐसा  मेरे  घर  से  है  गया 
सबकुछ वो साथ ले गया बस छोड़ कर मुझे/4/

लहज़ा  मिज़ाज  नाज़ नज़रिया बदल गया
आने  लगा है  याद  वो   हर बात  पर  मुझे/5/

आदत  में है शुमार  वो  कुछ इस कदर मेरे
उसके  बग़ैर  इक  दो कदम  है   दुभर मुझे/6/

No comments:

Post a Comment