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तन्हाईयों का खौफ़ रहा इस कदर मुझे
लगने लगा है अपने ही घर अब तो डर मुझे/1/
परछाईयों से रोज़ ही लड़ता झगड़ता हूँ
होने लगी है खीज़ जरा बात पर मुझे/2/
दीवारें चीखतीं हैं दरो बाम चीखते
खाने को दौड़ता है ये सूना सा घर मुझे/3/
वो जाने वाला ऐसा मेरे घर से है गया
सबकुछ वो साथ ले गया बस छोड़ कर मुझे/4/
लहज़ा मिज़ाज नाज़ नज़रिया बदल गया
आने लगा है याद वो हर बात पर मुझे/5/
आदत में है शुमार वो कुछ इस कदर मेरे
उसके बग़ैर इक दो कदम है दुभर मुझे/6/
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