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हालात खौफ़ तर है यूँ मुश्किल निबाह है
फेहरिस्त हादसों की भी लम्बी अथाह है/1/
दैरो हरम के नाम पे झगड़े यूँ देख कर
इंसानियत भी मांग रही अब पनाह है/2/
फैली हुई है नफरतों की आग किस कदर
सहमा हुआ ये दौर ही इसका गवाह है/3/
मजहब के ठेकेदार सिखाते हैं दुश्मनी
इनके खिलाफ बोलना कुछ भी गुनाह है/4/
जीना अगर सुकून से तुम चाहते यहाँ
आंखें लो मूंद मौन रहो बस सलाह है/5/
खाली गया है लौट मेरे घर से कल फकीर
तब से खुदा के दर मेरी नीची निगाह है/6/
अच्छा लगे जो गौर से उसको न देखना
गर दिख गया जो दोष तो जीवन तबाह है/7/
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