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ये जिन्दगी की शरारत कहूँ तो किससे कहूँ
बहुत है इससे शिकायत कहूँ तो किससे कहूँ/1/
जरा सी बात पे पानी बरसने लगता है
अजब इन आंखों की आदत कहूँ तो किससे कहूँ/2/
तमाम रिश्ते मोबाइल में कैद रहते हैं
किसे है मिलने की फुरसत कहूँ तो किससे कहूँ/3/
वो इक खयाल न अब तक कहा गया हमसे
जो कहने दिल की है हसरत कहूँ तो किससे कहूँ/4/
करीबियों में हम उनके बताए जाते हैं
हमी से उनकी अदावत कहूँ तो किससे कहूँ/5/
यूँ बे सबब तो कहीं तल्ख़ियाँ नही आती
दिली खरासें मलालत कहूँ तो किससे कहूँ/6/
बदल दिया है समय ने तो अच्छे अच्छों को
तू मेरी खास थी चाहत कहूँ तो किससे कहूँ/7/
बहुत करीब से देखा है दूर होते तुम्हे
लगी जो चोट निहायत कहूँ तो किससे कहूँ/8/
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