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रिश्ते बिगड़ते बनते हैं औकात देखकर
होती है नातेदारियाँ भी जात देख कर/1/
आंसू तमन्ना ख्वाब तलब आरजू खुशी
बाजार सजते हैं बड़े जज्बात देख कर/2/
करते नही हैं अब कभी फरमाइशें नयी
बच्चे सयाने हो गये हालात देख कर/3/
मत कर बखान यार तू अपनी उड़ान का
अंजाम दिख रहा तेरी शुरूआत देख कर/4/
गिरहें तमाम खुल गईं खुलते ही इक सिरा
मन फिर दुखी है गुजरे वो लमहात देख कर/5/
जद्दोजहद हर एक कदम सांस सांस की
मन हो गया है खिन्न ये दिन रात देख कर/6/
धिक्कारते चढ़ावे हैं मंदिर के खुद को अब
बाहर कतारें भूखी सी इफ़रात देख कर/7/
हर पल बदलती रहती है सुर अपने जिंदगी
मत कर गुरूर खुशियों के नगमात देख कर/8/
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