Wednesday, 12 April 2023

रिश्ते बिगड़ते बनते हैं औकात देखकर

221 2121 1221 212 
रिश्ते    बिगड़ते    बनते  हैं  औकात देखकर
होती है   नातेदारियाँ    भी     जात  देख कर/1/

आंसू     तमन्ना  ख्वाब तलब    आरजू खुशी 
बाजार  सजते हैं    बड़े     जज्बात देख कर/2/

करते  नही  हैं   अब  कभी   फरमाइशें नयी 
बच्चे    सयाने   हो  गये    हालात  देख कर/3/

मत कर  बखान  यार  तू  अपनी  उड़ान का
अंजाम  दिख रहा  तेरी  शुरूआत  देख कर/4/

गिरहें  तमाम  खुल गईं  खुलते ही इक सिरा
मन फिर दुखी है गुजरे वो लमहात देख कर/5/

जद्दोजहद   हर  एक  कदम  सांस सांस की
मन  हो गया है  खिन्न  ये दिन रात देख कर/6/

धिक्कारते  चढ़ावे हैं  मंदिर के खुद को अब
बाहर  कतारें   भूखी सी  इफ़रात   देख कर/7/

हर पल बदलती रहती है  सुर अपने जिंदगी
मत कर गुरूर खुशियों के नगमात देख कर/8/

No comments:

Post a Comment