22 22 22 22 22 2
मत सोंचो भीतर से कैसे निकलेंगे
अच्छों के सब यार भी अच्छे निकलेंगे/1/
ऊपर से जो कड़वे कड़वे लगते हैं
भीतर से वो बिल्कुल मीठे निकलेंगे/2/
गुमसुम खोये खोये से जो दिखते हैं
उनके मन में झांको बच्चे निकलेंगे/3/
तुम मुश्किल लिखते जाओ और मैं मंजिल
ऐसी ही कोशिश से रस्ते निकलेंगे/4/
भीड़ बहुत है उम्मीदों की इस घर में
रोज़ नये नये से खर्चे निकलेंगे/5/
बात बढ़े इससे बेहतर है थम जाओ
दूर तलक वरना फिर किस्से निकलेंगे/6/
फिर से त्योहारों का मौसम आया है
अरमानों के पूर्जे़ पूर्जे़ निकलेंगे/7/
राम लगे आसान सभी को दुनिया में
राम पे ही बस सारे चर्चे निकलेंगे/8/
मैं ही बस क्यूँ लक्ष्य सभी का बनता हूँ
कुछ ना कुछ तो दोष सभी में निकलेंगे/9/
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