22 22 22 22 22 2
दिल की बात सभी से कहना ठीक नही
ज्यादा होना सीधा सच्चा ठीक नही/1/
आंखे चुगली कर देतीं हैं अक्सर ही
बे मतलब बे वक़्त में हँसना ठीक नही/2/
झांक नही पाता है अपने भीतर जो
शख्स वही कहता है दुनिया ठीक नही/3/
अपनी गलती को छिपाने की खातिर
दूसरों पर इल्ज़ाम लगाना ठीक नही/4/
खुद से भी बनती नही है जब अपनी
औरों से करना फिर शिकवा ठीक नही/5/
यार मिले बस एक मिले वफादार मिले
बे मतलब ही भीड़ बढ़ाना ठीक नही/6/
उलझन तो सबके ही हिस्से आती है
उलझन में खुद को उलझाना ठीक नही/7/
याद आएंगे हम तो फिर पछताओगे
जिन्दगी तेरा इतना नखरा ठीक नही/8/
बेहतर है खुद कृष्ण सरीखे यार बनो
यारों में तुम ढूंढो कान्हा ठीक नही/9/
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