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न चैन राहत सुकूं है सुर्खी की शख्सियत में
महक पसीने की है जमीनी की शख्सियत में/1/
जरा जरा सी बचा के रक्खी है हमने अब तक
निशानियाँ अपने गांव मिट्टी की शख्सियत में/2/
है कांधो पर मुल्क की हिफाज़त की जिम्मेदारी
यकीं है मेरे वतन को वर्दी की शख्सियत में/3/
जो जिंदगी कर चुकी मशक्कत है भूख से वो
न जायका ढूंढती है रोटी की शख्सियत में/4/
बस आदतन पी रहा लहू आम आदमी का
न जाने क्या खासियत है खादी की शख्सियत में/5/
हवाओं के रुख पे चल रही जिंदगी है सबकी
नही कोई अहमियत है मर्ज़ी की शख्सियत में/6/
तनाव से मुश्किलें ही लेतीं हैं जन्म फिर से
मिले समाधान खुशमिजाजी की शख्सियत में/7/
स्वतंत्रता के तो अर्थ बस आप उनसे पूछो
किया हो जिसने बसर गुलामी की शख्सियत में/8/
उमीद मत छोड़ना कभी मन से जीतने की
सफलता मिलती है हौसलों ही की शख्सियत में/9/
है उसकी मौजूदगी तो निश्छल सरल हृदय में
तलाश मत कर उसे तू मुर्ति की शख्सियत में/10/
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