Wednesday, 12 April 2023

खिलखिलाती मचलती रसीली ग़ज़ल

212 212 212 212 
खिलखिलाती    मचलती      रसीली ग़ज़ल
खो  गई   अब  कहाँ        गुदगुदाती ग़ज़ल /1/

दरमियाँ   हादसों   के       बसर   कर  रही
आंसूओं   में    नहायी    सिसकती   ग़ज़ल/2/

चल  रही    आजकल        खूब  बाजार में
चूभती    तल्ख़ सी    और     तीखी  ग़ज़ल/3/

हसरतों  और   तकाजो  में   उलझी  दिखी 
रोटियों   से   न   बढ़   आगे   पायी  ग़ज़ल/4/

गांव  भी   तो     बदल   हैं   गये   शहर में
अब   कहाँ     ढूंढने     जायें   देशी ग़ज़ल/5/

फूल   खुशबू  चमन   ख्वाब  जुगनू  गगन
अब  कहाँ  चांद  तारों   पे    बनती  ग़ज़ल/6/

चल   रही  है    उलटफेर   शब्दों   की बस
अब   किसी के   गले  ना   उतरती  ग़ज़ल/7/

बस   रवायत    निभाती   रही    हर समय
दिल से दिल की कभी कह न पायी ग़ज़ल/8/

दायरों  में      नजरियों  में      सिमटी हुई
आ रही  आजकल    हल्की हल्की ग़ज़ल/9/

मन  को  भाये      दे  पैगाम    सौहार्द का
अब  दिखाई   न  देती   वो  अच्छी ग़ज़ल/10/

एक   मिसरे   पे   आकर  अटक   सी गई
होते-होते      मुकम्मल     अधूरी   ग़ज़ल/11/

कह  रहा  जी में  जिसके   जो आया वही
हो गयी    इस कदर   आज  सस्ती ग़ज़ल/12/

दायरों  में      नजरियों  में      सिमटी हुई
आ रही  आजकल   हल्की हल्की  ग़ज़ल/13

रह गई   कैद  होकर      किताबों  में  बस
जिनको कहती हैं दुनिया ये अच्छी ग़ज़ल/14/

No comments:

Post a Comment