212 212 212 212
खिलखिलाती मचलती रसीली ग़ज़ल
खो गई अब कहाँ गुदगुदाती ग़ज़ल /1/
दरमियाँ हादसों के बसर कर रही
आंसूओं में नहायी सिसकती ग़ज़ल/2/
चल रही आजकल खूब बाजार में
चूभती तल्ख़ सी और तीखी ग़ज़ल/3/
हसरतों और तकाजो में उलझी दिखी
रोटियों से न बढ़ आगे पायी ग़ज़ल/4/
गांव भी तो बदल हैं गये शहर में
अब कहाँ ढूंढने जायें देशी ग़ज़ल/5/
फूल खुशबू चमन ख्वाब जुगनू गगन
अब कहाँ चांद तारों पे बनती ग़ज़ल/6/
चल रही है उलटफेर शब्दों की बस
अब किसी के गले ना उतरती ग़ज़ल/7/
बस रवायत निभाती रही हर समय
दिल से दिल की कभी कह न पायी ग़ज़ल/8/
दायरों में नजरियों में सिमटी हुई
आ रही आजकल हल्की हल्की ग़ज़ल/9/
मन को भाये दे पैगाम सौहार्द का
अब दिखाई न देती वो अच्छी ग़ज़ल/10/
एक मिसरे पे आकर अटक सी गई
होते-होते मुकम्मल अधूरी ग़ज़ल/11/
कह रहा जी में जिसके जो आया वही
हो गयी इस कदर आज सस्ती ग़ज़ल/12/
दायरों में नजरियों में सिमटी हुई
आ रही आजकल हल्की हल्की ग़ज़ल/13
रह गई कैद होकर किताबों में बस
जिनको कहती हैं दुनिया ये अच्छी ग़ज़ल/14/
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