Wednesday, 12 April 2023

जंग छिड़ी छंदों दोहों पर सैफाई के कमरे में

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जंग  छिड़ी    छंदों  दोहों  पर,    सैफाई  के   कमरे में। 
फिर नंगी हुई    देख   सियासत,    गोसाईं के  कमरे में।। /1/

अपने-अपने  राम हुए  अब,  अपनी अपनी  रामायण।
बिलख  रहा  चिंतन  मानस का,    दानाई के  कमरें में।। /2/

फोन के बस  की पैड पर मत,  देश  बदलते रह जाना।
फेसबुक  ट्वीटर   नही  मिलते,  सच्चाई के  कमरें में।। /3/

त्याग तपस्या बलिदान और,   प्रेम सिखाता  है मानस। 
दृष्टि दोष है   दोष देखना ,    चौपाई के        कमरे में।। /4/

कत्ल हुई   मानवता फिर से, मजहब ग्रस्त मुहल्लों में।
दाग   बहुत    गहरे   पसरे हैं,      दंगाई  के   कमरें में।। /5/

भूख की  दरकार  है  रोटी,  चाहे  जिससे  मिल जाए। 
मंदिर मस्जिद  लरज   रहे हैं,   चतुराई  के   कमरें में।। /6/

नोटों के  नीचे  दबा  मिला,  कराहता   घायल  बेबस। 
कुछ  कहने की  चाह लिए सच,  अच्छाई के कमरें में।। /7/

कोई  महीन   कोई  हल्के,     हर  मुद्दे    पीसे  जाते। 
वक़्त के  गोद में   बरसों तक,     पैमाई के  कमरें में।। /8/

देख रहे   उस्ताद  ज़मूरे,  घायल  मन  की पीड़ा को। 
अश्क  बहाते   मिलते   तुलसी,  रघुराई के  कमरें में/9/

दानाई - बुद्धिमता 
शकेबाई - धैर्य, धीरज, सब्र, सहिष्णुता,
पैमाई - मापने का कार्य, पैमाइश

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