1212 1122 1212 22
उतार लाइये ऊँची दुकान का सूरज
बुझा बुझा है जरा आसमान का सूरज/1/
गली मुहल्ले का छप्पर मचान का सूरज
कभी दिखा दो हमें भी बिहान का सूरज /2/
लिहाफ़ ओढ़ के दुबका पड़ा है बिस्तर पर
ठिठुरता कांपता डिजिटल जहान का सूरज/3/
समेट करके उजाले यतीम बस्ती के
मचल रहा है बड़े खानदान का सूरज/4/
कतारें देख के कातर निगाहों के बाहर
सहम गया है बहुत आस्तान का सूरज/5/
उदासियाँ जहाँ पसरी हुई है सीने में
उगेगा कैसे वहाँ इत्मिनान का सूरज/6/
दिया तले का अंधेरा मिटा न पाया तो
है फालतू ही समझ स्वाभिमान का सूरज/7/
कसौटियों के तपन में झुलस के बूझ गया
लुभावना था बहुत हुक्मरान का सूरज/8/
महोत्सवों में जरा व्यस्त चल रहा करके
थका थका सा दिखा संविधान का सूरज/9/
किसी के प्यार ने दी वर्जिनिटी की कुर्बानी
दिखाया वक़्त ने जब इम्तिहान का सूरज/10/
मुहब्बतों की जरूरत है खूब दुनिया को
परे ही रक्खो अभी खींच तान का सूरज/11/
बरस रही है मेरे सर पे नेमतें हर पल
है मेरे साथ में माँ के अमान का सूरज/12/
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