Wednesday, 12 April 2023

उतार लाओ अब ऊँची दुकान का सूरज

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उतार  लाइये     ऊँची   दुकान    का    सूरज
बुझा बुझा है  जरा       आसमान  का  सूरज/1/

गली  मुहल्ले  का  छप्पर  मचान  का  सूरज
कभी  दिखा  दो  हमें  भी  बिहान  का सूरज /2/

लिहाफ़ ओढ़ के  दुबका  पड़ा है  बिस्तर पर
ठिठुरता कांपता डिजिटल  जहान का सूरज/3/

समेट  करके    उजाले     यतीम    बस्ती के
मचल  रहा है    बड़े    खानदान  का  सूरज/4/

कतारें  देख  के   कातर   निगाहों के  बाहर
सहम  गया  है  बहुत    आस्तान  का सूरज/5/

उदासियाँ   जहाँ   पसरी    हुई  है   सीने में
उगेगा  कैसे   वहाँ   इत्मिनान    का  सूरज/6/

दिया  तले का  अंधेरा   मिटा  न   पाया तो
है फालतू ही समझ  स्वाभिमान  का सूरज/7/

कसौटियों के तपन में  झुलस के बूझ गया
लुभावना  था  बहुत   हुक्मरान  का सूरज/8/

महोत्सवों में  जरा   व्यस्त  चल रहा करके
थका थका सा  दिखा  संविधान का सूरज/9/

किसी के प्यार ने दी वर्जिनिटी की कुर्बानी
दिखाया वक़्त ने जब इम्तिहान का सूरज/10/

मुहब्बतों  की  जरूरत है खूब दुनिया को
परे ही रक्खो  अभी खींच तान का सूरज/11/

बरस  रही है  मेरे  सर पे  नेमतें  हर पल
है  मेरे  साथ में  माँ के अमान का सूरज/12/

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