Wednesday, 12 April 2023

कहाँ दिन गुजारा कहाँ रात गुजरी

122 122 122 122 
कहाँ  दिन  गुजारा   कहाँ  रात गुजरी
किसे है  खबर  कब ये बरसात गुजरी/1/

गई  जिंदगी  भी गुजर  हमको  जी के
लिये  बैठे  हम   रह गए   बात गुजरी/2/

है बेमोल  उस वक़्त का  लम्हा लम्हा
वो थी  जिंदगी   जो तेरे साथ  गुजरी/3/

बहुत  थक  गये     ढोते ढोते  अंधेरा
नजर से  उजालों की  सौगात  गुजरी/4/

तरसती कई  जिंदगी खुशियों खातिर
कहीं  फिर से  देखो है  बारात गुजरी/5/

बहाली  हो  रिश्ता  उसी की  गली से
जिगर चाहता  फिर  वही बात गुजरी/6/

नसीबों  से  हम  चोट  खाए हैं वरना
थी  ऊँचे  घरानों में   औकात  गुजरी/7/

सवेरे की  चौखट पे  फिर से खड़ी है 
अमानत  उजालों  की ले रात गुजरी/8/

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