122 122 122 122
कहाँ दिन गुजारा कहाँ रात गुजरी
किसे है खबर कब ये बरसात गुजरी/1/
गई जिंदगी भी गुजर हमको जी के
लिये बैठे हम रह गए बात गुजरी/2/
है बेमोल उस वक़्त का लम्हा लम्हा
वो थी जिंदगी जो तेरे साथ गुजरी/3/
बहुत थक गये ढोते ढोते अंधेरा
नजर से उजालों की सौगात गुजरी/4/
तरसती कई जिंदगी खुशियों खातिर
कहीं फिर से देखो है बारात गुजरी/5/
बहाली हो रिश्ता उसी की गली से
जिगर चाहता फिर वही बात गुजरी/6/
नसीबों से हम चोट खाए हैं वरना
थी ऊँचे घरानों में औकात गुजरी/7/
सवेरे की चौखट पे फिर से खड़ी है
अमानत उजालों की ले रात गुजरी/8/
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