2122 1122 1212 22
उम्र भर खुद को बस अख़बार है किया हमने
अपनी हस्ती का इश्तेहार है किया हमने/1/
जिंदगी खेलती है खेल धूप छांव के बस
खुशियाँ बेचीं है ये व्यापार है किया हमने/2/
हसरतें ख्वाहिशें उम्मीद हैं सिसकती मिली
खुद को कुछ ऐसे भी लाचार है किया हमने/3/
अश्क दिन रात टपकते हैं छप्परों से मियांँ
हारने से तो पर इंकार है किया हमने/4/
छत को थामा है दरकती हुई दिवारों ने
दरमियाँ खुद को भी दीवार है किया हमने/5/
बात ये और है हम कुछ समझ नही पाये
देर तक जीस्त का दीदार है किया हमने/6/
जख्म के टांके पुराने थे खुल गये फिर से
खुद को दुख सहने को तैयार है किया हमने/7/
बे सबब बे मजा बे लुत्फ़ बस गुजरती है
जिंदगी के लिए किरदार है किया हमने/8/
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