Wednesday, 12 April 2023

उम्र भर खुद को बस अखबार है किया हमने

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उम्र भर खुद को बस अख़बार है  किया हमने 
अपनी  हस्ती  का  इश्तेहार   है  किया  हमने/1/

जिंदगी  खेलती  है   खेल  धूप छांव   के बस 
खुशियाँ  बेचीं  है  ये  व्यापार है  किया हमने/2/

हसरतें ख्वाहिशें  उम्मीद  हैं  सिसकती मिली 
खुद को कुछ ऐसे भी लाचार है  किया  हमने/3/

अश्क  दिन रात  टपकते हैं  छप्परों  से मियांँ 
हारने  से  तो    पर इंकार   है    किया  हमने/4/

छत  को  थामा है    दरकती  हुई   दिवारों ने
दरमियाँ खुद को भी  दीवार है  किया  हमने/5/

बात ये  और  है  हम कुछ  समझ नही  पाये
देर तक  जीस्त का   दीदार   है किया  हमने/6/

जख्म के  टांके  पुराने थे  खुल गये  फिर से 
खुद को दुख सहने को तैयार है किया हमने/7/

बे सबब  बे मजा  बे लुत्फ़  बस  गुजरती है 
जिंदगी  के लिए  किरदार  है  किया   हमने/8/

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