1212 1122 1212 22
सियाह रात ये किसने दिये जलाए है
मुझे बुलाने को घर तक उजाले आए हैं/1/
खमोशियों के शहर कौन गुनगुनाता है
है कौन जिसने ये सहरा में फूल उगाए हैं/2/
उम्मीद किसने बंधाई रंगीनियों की यहाँ
ये किसकी वज्ह से गुलशन भी मुस्कुराए हैं/3/
खुशामदीद है उसका कि वज्ह से जिसके
बहार खुश्बू के मंजर यूँ लौट आए हैं/4/
अंधेरा भागा है खुद को समेट कर फौरन
गली मुहल्लों में जब दीप जगमगाए हैं/5/
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