Wednesday, 12 April 2023

सियाह रात ये किसने दिये जलाए हैं

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सियाह रात   ये   किसने    दिये    जलाए है
मुझे   बुलाने को   घर तक   उजाले आए हैं/1/

खमोशियों   के  शहर   कौन   गुनगुनाता है 
है  कौन  जिसने  ये  सहरा में फूल उगाए हैं/2/

उम्मीद  किसने  बंधाई  रंगीनियों  की  यहाँ
ये किसकी वज्ह से गुलशन भी मुस्कुराए हैं/3/

खुशामदीद है उसका  कि  वज्ह से जिसके
बहार  खुश्बू  के   मंजर   यूँ   लौट  आए हैं/4/

अंधेरा  भागा है  खुद को  समेट कर फौरन
गली  मुहल्लों  में   जब  दीप  जगमगाए हैं/5/

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