Wednesday, 12 April 2023

न आए संसार में फिर ईश्वर

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न   आए   संसार में    फिर ईश्वर
दिखे   न   लाचार में   फिर ईश्वर/1/

दुआओं में   कुछ  असर  रहा ना
है   मस्त   दरबार में   फिर ईश्वर/2/

भटक   गये   रास्ता   हैं   शायद
जो   ढूंढते   प्यार  में  फिर ईश्वर/3/

मचल   रही है    तमन्ना    बेबस
है  मौन   अखबार में फिर ईश्वर/4/

न  आस  उम्मीद  रह  गयी अब
मिले  न  सरकार  में  फिर ईश्वर/5/

हैं  ढूंढते    पत्थरों  में    उसको
मिले हैं   स्वीकार में  फिर ईश्वर/6/

गरीब  का   पेट  भरने  खातिर
बिके  हैं  बाजार में   फिर ईश्वर/7/

यकीं का विश्वास का है मसला
है मन के आधार में फिर ईश्वर/8/

यकीं  नही है   अगर  जरा तो
न  ढूंढ  बेकार  में  फिर  ईश्वर/9/

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