12122 12122
न आए संसार में फिर ईश्वर
दिखे न लाचार में फिर ईश्वर/1/
दुआओं में कुछ असर रहा ना
है मस्त दरबार में फिर ईश्वर/2/
भटक गये रास्ता हैं शायद
जो ढूंढते प्यार में फिर ईश्वर/3/
मचल रही है तमन्ना बेबस
है मौन अखबार में फिर ईश्वर/4/
न आस उम्मीद रह गयी अब
मिले न सरकार में फिर ईश्वर/5/
हैं ढूंढते पत्थरों में उसको
मिले हैं स्वीकार में फिर ईश्वर/6/
गरीब का पेट भरने खातिर
बिके हैं बाजार में फिर ईश्वर/7/
यकीं का विश्वास का है मसला
है मन के आधार में फिर ईश्वर/8/
यकीं नही है अगर जरा तो
न ढूंढ बेकार में फिर ईश्वर/9/
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