Wednesday, 12 April 2023

पेट भरे हो तब ही तो ये मजहब सारे दिखते हैं

22 22 22 22 22 22 22 2 
पेट भरे हो   तब  ही  तो  ये  मजहब   सारे  दिखते हैं 
भूखे को  कब   मंदिर मस्जिद  और  नज़ारे दिखते हैं /1/

करती है  ये  भूख तमाशे   जीवन में  कितने हर दिन 
करतब   करते   चौराहों  में    कुछ   बेचारे  दिखते हैं/2/

मुफलिसों की  झोंपड़ियों में  खिड़की कोई नही होती 
पैबंदों में   छिपते   बस    तकदीर के   मारे  दिखते हैं/3/

टखने  छाती से    चिपका कर    सो  जाते हैं   बेचारे 
मांस  नही है   अस्थि पंजर  जिस्म के  सारे दिखते हैं/4/

अश्क उबाले  माँ ने   रात भर  खाली से   पतीले पर 
भूख   के  मारे    बेसुध  बच्चे     हारे हारे    दिखते हैं/5/

सरकारों ने  जनता को   बस   वादों से    बहलाया है 
वोटों   खातिर   गली गली  ये   हाथ पसारे  दिखते हैं/6/

बाप के कांधो पर चढ़ कर तो दुनिया अच्छी लगती है
सच्चाई  से   जब  मिलते  हैं   दिन में   तारे  दिखते हैं/7/

दुल्हन सी   सज धज  कर   बैठीं  हैं  जरूरतें  घर में
आरज़ू   हसरत   और  उम्मीदें   चीर कुंवारे दिखते हैं/8/

चेहरे  कई   लगा   रक्खे हैं   सबने   अपने  चेहरे पर
जाहिर है  जोकर  के  बाकी   छिपते  सारे  दिखते हैं/9/

कौन मुकम्मल  है इस जग में  किसमें कोई दोष नही
सब में  ही है  कुछ ना कुछ पर खास हमारे दिखते हैं/10/

No comments:

Post a Comment