Wednesday, 12 April 2023

चल रही है अजब सी हवा आजकल

212 212 212 212

चल रही है अजब सी हवा आजकल
बे असर हो गई सब  दुआ आजकल/1/

घर के आंगन से बूढा शजर जो गया
चूभने  सी   लगी है   सबा आजकल/2/

हसरतें  बस    सुलगती  रहीं उम्र भर
है  जरूरी  जरूरत   जरा आजकल/3/

खत्म  होता  नही  जिंदगी का सफर 
आदमी  बस मुसाफिर बना आजकल/4/

वक़्त के साथ  भर तो  गये जख्म पर
दिख रहा दाग सा क्यूँ भला आजकल/5/

रस्म सी  रह  गई हैं ये  खुशियाँ सभी
अब न  बाहम  रहा  राब्ता आजकल/6/

दरमियाँ घर के  दीवार  की जो खड़ी
अब है भाई  पडोसी  नया आजकल/7/

माँ ने दी सीख   रोटी के  बंटवारे की
बांट बेटों ने  मां को  लिया आजकल/8/

आईना  कल  दिखाया  उसे  वक़्त ने
वो है  उलझा हुआ सा जरा आजकल/9/

आस जिनसे थी कल रहबरी की हमें
बन के बैठे हैं  वो तो खुदा आजकल/10/

भूख   रोटी    पे   चर्चे  चुनावों में है
है यहाँ फिर ये मसला खड़ा आजकल/11/

है  फसादों  की जड़ में  ये  दैरो हरम
आदमीयत   न   मुद्दा  रहा आजकल/12/

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