2122 2122 2122 212
क्या गजब हालात हैं भई वाह वा क्या बात है
उलझनें इफ़रात है भई वाह वा क्या बात है /1/
कट रही है जिंदगी हर दिन तमाशे कर नये /2/
सांसे भी खैरात हैं भई वाह वा क्या बात है
कुछ जरुरत के लिए नीलाम हर दिन हो रहे
बस दिली जज्बात हैं भई वाह वा क्या बात है/3/
ख्वाहिशों की अर्थियाँ हर दिन निकलती है यहाँ
टुकड़ों में औकात हैं भई वाह वा क्या बात है/4/
रोज ही चेहरे बदल कर मिलने आती है हमें
कैसे ये आफ़ात हैं भई वाह वा क्या बात है/5/
खौफ़ तर मंजर दिखे हर हाथ ही खंजर दिखे
सब लगाए घात हैं भई वाह वा क्या बात है/6/
हर जुबाँ खामोश है कुछ बोलता कोई नही
कैसे ये दिन रात हैं भई वाह वा क्या बात है/7/
जागते रातें हैं बीती खोये खोये सारा दिन
उलझे से लमहात हैं भई वाह वा क्या बात है/8/
भीड़ सी रहती है यूँ तो रिश्ते नातों की यहाँ
खिलवतें सौगात हैं भई वाह वा क्या बात है/9/
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