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हम ढूंढने को निकले थे कुछ आदमी यहाँ
पर जात में ही उलझी मिली जिंदगी यहाँ/1/
अंधे बने गवाह है बहरे सुने दलील
झूठों में दबदबे की लगी होड़ सी यहाँ/2/
थोड़ा संभाल कर के करें गुफ्तगू कोई
मचते बवाल बात से अब अनकही यहाँ/3/
तन्हाईयों में बैठ बड़ी फुरसतों के साथ
हम ढूंढते हैं खुद की वजह होने की यहाँ/4/
तेरी सुनी गयी तो ये तेरा नसीब है
वरना खुदा तो मेरा भी है पास ही यहाँ/5/
खुद ही है इक सवाल औ खुद ही जवाब है
ये जिंदगी भी खूब अजब सी लगी यहाँ/6/
सूरज की राह ताकते इक उम्र खप गई
आयी न कोई सुब्ह कोई रोशनी यहाँ/7/
दीवानगी की हद से परे और लोग थे
जद्दोजहद में आज है हर जिंदगी यहाँ/8/
रब से दुआएँ मांग लो अम्नो अमान की
देखे गये हैं भेड़िये कुछ नफरती यहाँ/9/
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