1222 1222 1222 1222
सुलगती देख कर धरती को अंबर रोने लगता है
मिटाने प्यास धरती की हो कातर रोने लगता है /1/
घुमड़ते है मचलते है मिलन के वास्ते बादल
घटा जब मुस्कुराती है तो छप्पर रोने लगता है/2/
खिली बाँछें किसी की है कहीं अरमाँ मचलते हैं
दरकती देख दीवारें कहीं घर रोने लगता है/3/
कहीं कपड़े कहीं गहने कहीं पर कार आती है
दवाई को तरसता बाप अक्सर रोने लगता है/4/
गया जिस हाल में जिस मोड़ पर वो छोड़ कर जैसे
वहीं है जिंदगी ठहरी सुखनवर रोने लगता है/5/
मुझे ऐ माँ तेरे आंचल के साये की जरूरत है
मेरा नन्हा जिगर तुझको न पाकर रोने लगता है/6/
जियादा खास होना भी बहुत अच्छा नही होता
तराशा जाता है इतना कि पत्थर रोने लगता है/7/
कभी हालात जब करता सरे बाजार है मजबूर
बहुत शर्मिंदगी होती है पैकर रोने लगता है /8/
सफर में साथ रख लो याद कुछ अच्छे दिनों की भी
जरा सी देख खामोशी ये मंजर रोने लगता है/9/
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