2122 1122 1122 22
लम्हें खुद के लिए दो चार गुजारा होता
खुद का चेहरा ही कभी शीशे में देखा होता/1/
कोई शिकवा न गिला जिंदगी से होता फिर
गर जो फुर्सत में कभी खुद को पुकारा होता/2/
फिर तेरी बातें भिगोने लगी हैं आंखें मेरी
काश तुम अजनबी ही रहते तो बढ़िया होता/3/
देख माँ बाबा को मजबूर ये सोचें बेटी
गर मैं पैदा ही नही होती तो अच्छा होता/4/
मैं अदाकार हूँ किरदार बदलता है मेरा
काश शिद्दत से मुझे तूने निहारा होता/5/
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