Saturday, 23 July 2022

लम्हें खुद के लिए दो चार गुजारा होता

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लम्हें   खुद  के  लिए   दो  चार   गुजारा  होता
खुद का  चेहरा  ही  कभी  शीशे में  देखा होता/1/

कोई  शिकवा  न  गिला   जिंदगी से होता फिर
गर जो  फुर्सत में  कभी खुद को  पुकारा होता/2/

फिर  तेरी  बातें   भिगोने    लगी हैं  आंखें मेरी
काश तुम  अजनबी  ही  रहते तो बढ़िया होता/3/

देख  माँ  बाबा   को    मजबूर   ये  सोचें  बेटी
गर  मैं  पैदा  ही  नही  होती  तो  अच्छा  होता/4/

मैं  अदाकार  हूँ   किरदार     बदलता  है  मेरा
काश  शिद्दत  से   मुझे   तूने     निहारा  होता/5/

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