Saturday, 23 July 2022

उदासियों से लिपट कर मैं गुनगुनाता क्या

1212 1122 1212 22
उदासियों  से   लिपट कर   मैं  गुनगुनाता क्या 
यूँ  रंजो गम  से  घिरा   रह के  मुस्कुराता क्या/1/

बहुत  करीब से  गुजरी है  अजनबी  की तरह
मैं   जिंदगी को   भला  और  आजमाता क्या/2/

मुझे  तो  वक़्त  भी  मजबूर  सा  मिला  बेहद
भला मैं  रूठता क्या नाज़ कुछ दिखाता क्या/3/

गुमाँ  न  पाने  पे  खोने पे  कुछ  मलाल  नही
कोई  भी  दर्द  कहो  दिल  मेरा  दुखाता क्या/4/

मैं अपने आप से अब तक मिला नही खुद ही
तुम्हे  बताओ  भला  खुद से  मैं मिलाता क्या/5/

है  अक्लमंद  यहाँ  पर  सब एक  से बढ़ कर 
मेरी बिसात  किसी को मैं कुछ सिखाता क्या/6/

है  जुगनुओं  को  भरम  रात  उनसे है रोशन
न  जलते  दीप  भरम  उनका टूट पाता क्या/7/

No comments:

Post a Comment