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कहाँ पे मौसम हँसी नज़ारे हैं तितलियाँ हैं
कहाँ जमी कहकहों की महफ़िल है मस्तियाँ हैं/1/
जरूरतें जिम्मेदारियाँ हसरतों का मजमा
यही है सौगात उम्र भर की तरक्कियाँ हैं/2/
सफर में पेंसिल से पेन तक कोई ना बताता
इक उम्र के बाद फिर सुधरती न गलतियाँ हैं/3/
मिली खुशी देख कर कि बेटा हुआ सयाना
पर रह गई आंख में उम्मीदों की किर्चियाँ हैं/4/
उदासियाँ कर रहें रफू जिंदगी की फिर भी
कहाँ कहाँ से न जाने गम रिस रहे यहाँ हैं/5/
थी रात व्याकुल बहुत जियादा ही भूख से तो
समझ के रोटी निगल गई चांद सुर्खियाँ हैं/6/
जरूरतें रोज़ पूछ लेतीं है तारीखों को
पगार की राह तकती माथे पे त्योरियाँ हैं/7/
न जिस्म ढंकने को पाई देता कोई यहाँ पर
उतारने को क़बा हजारों की बोलियाँ हैं/8/
तसल्लियाँ मिल रही थी कल जो चवन्नियों में
हजारों पा के भी अब न मिलती वो मस्तियाँ हैं/9/
बड़ी दरारें दिखी है माथे पे मेरे मौला
जरा मरम्मत नसीब की कर दुहाईयाँ हैं/10/
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