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मुझको मेरी मजूरी मेरा दाम चाहिए
अच्छा बुरा जो चाहे हो मुझे काम चाहिए/1/
उकता गया है मन ये मेरा फुरसतों से अब
मुझको भी अपनी जीस्त में कोहराम चाहिए/2/
सूरज की राह ताकते इक उम्र खप गई
अब अपने हक के वास्ते संग्राम चाहिए/3/
रक्खा सहेज कर है बहुत शोखियांँ हुजूर
मेहनत का अपने अब मुझे परिणाम चाहिए/4/
फिर उसके बाद रात बहुत देर तक रही
सूरज ने जब कहा मुझे आराम चाहिए/5/
मंजिल को क्या खबर है सफर के थकान की
अक्सर बुलंदियों को तो बस नाम चाहिए/6/
तकते हैं झूले गांव के राहों को हर घड़ी
उनको गये के आने का पैगाम चाहिए/7/
जो टूटकर भी रहते जुड़े हैं दरारों से
ऐसे ही रिश्तों के हमे इनआम चाहिए/8/
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