22 22 22 22 22 22 22
कब तक पेट की आग में पानी डाला जायेगा
जाने कब भूखों के मुंह में निवाला जायेगा/1/
छिपकर महलों के पीछे झांका करता है सुरज
जाने कब मुफलिस बस्ती में उजाला जायेगा/2/
जिंदा हैं कुछ लोग अभी अपने ज़मीरों से शायद
कब तक यूँ ही ये झूठा भरम पाला जायेगा /3/
भूखों ने कब पूछा है रोटी का मजहब क्या है
वो मस्जिद हो आया है अब शिवाला जायेगा/4/
कांपते गुजरी सर्द भरी रातें जिसकी झोपड़ में
उसके पड़ोसी घर से दरगाह दुशाला जायेगा/5/
देख सुहाने मंजर बच्चे गुमसुम से रहते हैं
उलझे हैं हम कैसे उनको संभाला जायेगा /6/
सांझ ढले घर जाएं कैसे खाली खाली जेब लिए
उम्मीदों को फिर से झांसे में डाला जाएगा/7/
आश्वासन के झांसे ये कब तक राहत देते हैं
जिंदा रहने फिर ढंग नया निकाला जाएगा/8/
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