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शिकायत है अदावत है मुहब्बत भी जताते हैं
रवायत जिंदगी की यूँ लियाकत से निभाते हैं /1/
नही है मुतमईन पर जिंदगी जीना तो है यारों
इसी कारण तो हम कितनी समस्याएं उठाते हैं/2/
कमर टूटी नही है तंगदस्ती है तो क्या गम है
हमारे हौसले हैं हम इरादा ओढ़े आते हैं/3/
मुसीबत में नही कोई नजर आता है दुनिया में
लगे अब मुस्कुराने तो हमारे यार आते हैं/4/
हकीकत से जरा वाकिफ अब हम हो गए लोगों
मुखौटे हैं चढ़े सब ओर सब झूठे ये नाते हैं/5/
चरागो को कहां कब तीरगी का भय सताता है
अंधेरों से निपटने वो उजाला ओढ़े आते हैं/6/
सितमगर हैं बड़े शातिर चालाकी भी बेहद है
सताते हैं रुलाते हैं हमेशा आजमाते हैं/7/
रही हरदम सवालों में मगर फिर भी तो अपनी है
भला अब जिंदगी का क्यूँ तमाशा हम बनाते हैं/8/
ये जो तकलीफ हैं सारे बस है उम्मीदों के कारण
कभी हमको रही है तो कभी वो भी लगाते हैं/9/
मेरी खामोशियों को मत समझ कमजोरियां मेरी
परेशां हूँ जरा वरना मुझे भी बात आते हैं/10/
कोई किरदार कैसा है नही परखा ये जा सकता
शहर में भेड़िये वहशी शराफत ओढ़े आते हैं/11/
गरीबों की जो बस्ती है वहाँ चूल्हा बुझा सा है
जतन कुछ ऐसा करते हैं चलो चूल्हा जलाते हैं/12/
इबादत और जियारत से परे भी एक दुनिया है
अंधेरा है वहां आओ चरागां करके आते हैं/13/
ये गूंगे बहरों की बस्ती यहाँ खामोशियां है बस
यही दस्तूर जीने का यहाँ है सब निभाते हैं /14/
रकीबो के शहर से लौट कर आए हुए हैं हम
जलालत की अदावत की ये बचकानी सी बातें हैं/15/
अदावत - दुश्मनी /रवायत _औपचारिकता/ लियाकत - योग्यता /मुतमईन - सन्तुष्ट /बाइस - कारण /मसाइब - मुसीबत /तंगदस्ती - गरीबी /सुकूत-खामोशी/इबादत - पूजा /जियारत - तीर्थ यात्रा /ज़लालत-अपमान/
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