Friday, 11 April 2025

शिकायत है अदावत है मुहब्बत भी जताते हैं

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शिकायत है   अदावत है      मुहब्बत भी     जताते हैं
रवायत     जिंदगी  की  यूँ    लियाकत से   निभाते हैं /1/

नही है  मुतमईन      पर  जिंदगी   जीना  तो है  यारों 
इसी    कारण तो हम   कितनी    समस्याएं  उठाते हैं/2/

कमर  टूटी नही है       तंगदस्ती है     तो  क्या गम है 
हमारे   हौसले हैं            हम   इरादा    ओढ़े आते हैं/3/

मुसीबत में  नही  कोई      नजर  आता है   दुनिया में
लगे  अब      मुस्कुराने  तो        हमारे   यार आते हैं/4/

हकीकत से   जरा  वाकिफ अब हम    हो गए लोगों
मुखौटे  हैं      चढ़े  सब ओर     सब   झूठे ये नाते हैं/5/

चरागो को   कहां कब    तीरगी का  भय   सताता है
अंधेरों से   निपटने        वो   उजाला   ओढ़े आते हैं/6/

सितमगर हैं   बड़े शातिर       चालाकी भी    बेहद है
सताते हैं        रुलाते हैं           हमेशा   आजमाते हैं/7/

रही  हरदम सवालों में   मगर  फिर भी तो  अपनी है
भला अब   जिंदगी का क्यूँ   तमाशा    हम बनाते हैं/8/

ये जो  तकलीफ हैं सारे  बस है  उम्मीदों के  कारण 
कभी  हमको  रही है तो      कभी  वो भी  लगाते हैं/9/

मेरी  खामोशियों को  मत  समझ  कमजोरियां मेरी
परेशां हूँ  जरा   वरना         मुझे  भी   बात आते हैं/10/

कोई   किरदार कैसा है  नही परखा  ये जा सकता
शहर में  भेड़िये    वहशी   शराफत    ओढ़े आते हैं/11/

गरीबों की  जो  बस्ती है  वहाँ   चूल्हा   बुझा सा है 
जतन  कुछ  ऐसा करते हैं  चलो   चूल्हा जलाते हैं/12/

इबादत  और  जियारत से   परे भी  एक दुनिया है
अंधेरा है   वहां  आओ      चरागां  करके  आते हैं/13/

ये  गूंगे बहरों की बस्ती   यहाँ   खामोशियां है बस
यही  दस्तूर   जीने का   यहाँ है      सब निभाते हैं /14/

रकीबो के   शहर से   लौट कर   आए  हुए हैं हम
जलालत की अदावत की ये बचकानी सी बातें हैं/15/

अदावत - दुश्मनी /रवायत _औपचारिकता/ लियाकत - योग्यता /मुतमईन - सन्तुष्ट /बाइस - कारण /मसाइब - मुसीबत /तंगदस्ती - गरीबी /सुकूत-खामोशी/इबादत - पूजा /जियारत - तीर्थ यात्रा /ज़लालत-अपमान/

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