Thursday, 10 April 2025

कोई इक रोज़ का किस्सा नही था

1222 1222 122 
कोई   इक रोज़ का   किस्सा नही था
समय  अपना  कभी  अच्छा  नही था /1/

तसल्ली   कब तलक   देते  स्वयं को 
भला  क्या  खुद से  ये धोखा नही था /2/

शगल  उसका  यही  गड़बड़ रहा बस
वो कुछ भी सोच कर कहता नही था /3/

बिछड़ना   तय रहा     उनका  हमारा
कभी  इसका   मगर   चर्चा  नही था/4/

गलत  हम  ही  रहे    हर बार साहब
कुसूर  उनका  कभी    होता नही था/5/

जिधर  मैं  हूँ   उधर     कोई  नही है
यहाँ  सच  बोलना    अच्छा नही था /6/

लगे हैं  मुस्कुराने  अब  तो   हम भी 
ये  दिल   पहले दुखी इतना नही था/7/

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