2122 2122 212
जितनी थी सब होशियारी जा चुकी
सारी रंगत सब खुमारी जा चुकी/1/
चल रही है अब रवायत जीने की
जिंदगानी तो गुजारी जा चुकी/2/
हर खुशी हर दर्द ही व्यापार है
अब इमोशन की बयारी जा चुकी/3/
बिक रहे हर रंग में आंसू हँसी
ये खबर अब इश्तेहारी जा चुकी/4/
जिंदगी ने ज्यादती की है बहुत
मौत तक ये जानकारी जा चुकी/5/
छोड़ भी दो बरगलाने की अदा
अब हुनरमंदी तुम्हारी जा चुकी /6/
No comments:
Post a Comment