Saturday, 12 April 2025

जितनी थी सब होशियारी जा चुकी

2122 2122 212 
जितनी थी सब होशियारी जा चुकी
सारी रंगत   सब खुमारी   जा चुकी/1/

चल रही है  अब  रवायत  जीने की
जिंदगानी  तो     गुजारी   जा चुकी/2/

हर खुशी     हर दर्द ही   व्यापार है
अब  इमोशन  की बयारी जा चुकी/3/

बिक रहे     हर रंग में    आंसू हँसी
ये खबर अब   इश्तेहारी  जा चुकी/4/

जिंदगी ने  ज्यादती   की है   बहुत
मौत  तक  ये  जानकारी जा चुकी/5/

छोड़ भी दो    बरगलाने की  अदा
अब  हुनरमंदी   तुम्हारी  जा चुकी /6/

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