122 122 122 122
कोई भी घड़ी भर में. कैसे लगेंगे
रहें चाहे जैसे निराले लगेंगे/1/
मिले जिंदगी की तरह जिंदगी गर
तो हम भी जरा मुस्कुराने लगेंगे/2/
बहुत कुछ है कहने को दिल में हमारे
मिलो दिल से दिल की सुनाने लगेंगे/3/
मिलेंगे पुराने जो साथी कहीं तो
बस अपनी तरक्की सुनाने लगेंगे/4/
गुजारी है जिन शर्तों पे जीस्त हमने
तुम्हें वो गुजरते जमाने लगेंगे/5/
जकड़ रक्खी हैं. हसरतें बेड़ियों से
तुम्हें देख वरना मचलने लगेंगे/6/
तेरी रहमतों के भरोसे पड़े हैं
तुझे छोड़ कर हम बिखरने लगेंगे/7/
तुझे देख दिल आहें भरने लगा है
संभलने में फिर से जमाने लगेंगे /8/
ग़ज़ल आपकी आप ही तक ना पहूँचे
तो चिंतन मनन व्यर्थ ही के लगेंगे/9/
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