Saturday, 12 April 2025

दीपक जला के शम्स दिखाने के बावजूद

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दीपक  जला  के  शम्स  दिखाने के   बावजूद 
काली  घनेरी  रात           छिपाने के  बावजूद /1/

बीमार   सी    तमन्ना      दवा    माँगती   फिरें 
गाने   तरक्कियों   के   यूँ    गाने के  बावजूद /2/

सबको   गुजारनी    तो   पड़ेगी  ही    जिंदगी
हँसने   हँसाने    रोने   रूलाने     के  बावजूद /3/

खामोश हूँ    जहाँ से      वहाँ से     पढ़ो मुझे
हँसना    मेरा   हुनर है    रूलाने के  बावजूद /4/

इक  उम्र ही    गुजर  गयी    लौटे  नही मगर
वादे   जो   कर गये हैं   न  आने के  बावजूद /5/

संघर्ष  और  शिकायतें  होती  कभी  न खत्म
होती है  खत्म    जिंदगी    छाने के  बावजूद /6/

तू  भी  ऐ जिंदगी       यूँ  बड़ी   लाजवाब है
सबकी समझ में  आने  न आने के  बावजूद /7/

खुद  को  तो  मानता  ही नही वो  गुनाहगार
सारे   गुनाह   सामने     लाने  के    बावजूद /8/

रिश्ता  किसी के  साथ  निभाया  नही  गया
रिश्ता  सभी के  साथ  निभाने  के  बावजूद /9/

मन में जमीं जो मैल है बस वो न धुल सकी
गंगा  में    रोज रोज     नहाने  के  बावजूद /10/

पहुचें  हुए हैं   कुंभ  नहाने         के  वास्ते 
मुर्गे  की  हड्डियाँ  तक  चबाने  के बावजूद /11/

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