Monday, 28 December 2020

गम की बस्ती के हर मकां तन्हा

2122 1212 22 
गम की बस्ती के हर मकांँ तन्हा 
इश्क में जख्म के   निशांँ तन्हा 

गुफ्तगू किस  तरह से  हो तुझसे
अब तो मिलती है हर जुबांँ तन्हा

तेरे  आने  की  हो  खबर  कैसे 
तेरे  दर   तेरा   आशियाँ  तन्हा

जिक्र करता नहीं कोई भी अब
तेरे   हर   यार   मेहरबांँ  तन्हा

तेरे जाने के बाद  क्या  ही रहा 
तेरे निस्बत है दास्ताँ तन्हा 

नेमते रुख बदल के  लौट गई
दिखता हर आदमी यहाँ तन्हा

इश्क़ में खुद को लोग भुले है 
यूँ न है दिल जिगर ये जाँ तन्हा

No comments:

Post a Comment