Monday, 28 December 2020

कि मुश्किल वक़्त को मुश्किल बताना भूल जाते हैं

1222 1222 1222 1222
कि  मुश्किल  वक़्त  को  मुश्किल  बताना भूल जाते हैं
जो  खुद  से   मिलते  हैं  हम   तो जमाना भूल जाते हैं/१/

उन्ही  से   पूछते   हैं   वज्ह   उनके    रूठने   की हम
सितमगर   जब  कभी    हमको   सताना भूल जाते हैं/२/

है  उलझी   इस कदर   जद्दोजहद  में   जिंदगी अपनी
कि  रोते हैं   तो     आंसू   ही    बहाना    भूल जाते हैं/३/

कुछ  उधड़े उधड़े  दिखते  हैं  हमे  रिश्तों के धागे सब 
कभी    पैबंद    इनमें    जब    लगाना    भूल  जाते हैं/४/

कि जिनके वास्ते ख्वाहिश सब अपनी दफ्न की हमने 
वो  बच्चे   फर्ज  अब अपने    निभाना   भूल  जाते हैं/५/

नये  मिल  जाते हैं  हर मोड़ पर  अब  दर्द भी अक्सर
 नये  से  मिल के  हम  भी  गम  पुराना  भूल  जाते हैं/६/

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