Monday, 28 December 2020

ढूंढ लेते सियासत हो हर बात पर

212 212 212 212 
ढूंढ  लेते    सियासत    हो   हर  बात  पर
मौन   रहते   हो     मुद्दों  पे     हालात पर

क्यूँ   डराते  हो    मासूम    जज्बात    पर
जोर   देते    हमेशा   हो    क्यूँ   जात  पर

ऐसे     हालात    को     बेतुकी   बात  को
मै   नही   मानता     मै     नही     जानता

हर खबर  आज  लथपथ  सनी सी  मिली
रक्त   में  ही   नहाकर    खुशी   हर  चली

हर कदम  हादसों  की है  महफिल  सजी
पर  सियासत  को  बस है  सियासत पड़ी

ऐसे   जमहूर   को      अहले  दस्तूर  को
मै   नही    मानता     मै    नही    जानता

साफ  सुथरी    छवि  से    सरोकार  क्या
सध रहा जब है  मतलब तो किरदार क्या

क्या  हमे  करना  कहता  है  संसार  क्या
मिल गया मुझको हक मेरा अब यार क्या

ऐसे  बाजार  को   मत के  अधिकार  को
मै  नही    मानता       मै   नही    जानता

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