212 212 212 212
ढूंढ लेते सियासत हो हर बात पर
मौन रहते हो मुद्दों पे हालात पर
क्यूँ डराते हो मासूम जज्बात पर
जोर देते हमेशा हो क्यूँ जात पर
ऐसे हालात को बेतुकी बात को
मै नही मानता मै नही जानता
हर खबर आज लथपथ सनी सी मिली
रक्त में ही नहाकर खुशी हर चली
हर कदम हादसों की है महफिल सजी
पर सियासत को बस है सियासत पड़ी
ऐसे जमहूर को अहले दस्तूर को
मै नही मानता मै नही जानता
साफ सुथरी छवि से सरोकार क्या
सध रहा जब है मतलब तो किरदार क्या
क्या हमे करना कहता है संसार क्या
मिल गया मुझको हक मेरा अब यार क्या
ऐसे बाजार को मत के अधिकार को
मै नही मानता मै नही जानता
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