221 1222 221 1222
जीने का तरीका भी आता है बहुत अच्छा
मुश्किल से रहा उसका रिश्ता है बहुत अच्छा
ता उम्र गुजारी है बस जद्दोजहद में ही
वो भीड़ में अपनो के तन्हा है बहुत अच्छा
देखा है दिया जलते मुफलिसों की बस्ती में
वो आज भी किश्तों पे जिंदा है बहुत अच्छा
बेपर्दा है रिश्ते सब महलों में दु महलों में
घर आज गरीबों के परदा है बहुत अच्छा
सजदे में झुका रहता वो गाहे-बगाहे ही
अब दैर हरम का ये चस्का है बहुत अच्छा
बच्चों के लिए रक्खे अशआर जमा करके
शर्मिंदा फकत देते बंदा है बहुत अच्छा
की खूब मशक्कत पर अब हार गया दिल से
बेटी को बिदा करते रोया है बहुत अच्छा
बस और जरा करते गुजरी है उमर सारी
चाहत की नही हद बस रखता है बहुत अच्छा
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