1222 1222 1222 1222
कहर बरपा भला कैसा कयामत सा नजारा है
जिधर देखो उधर दहशत भरा माहौल सारा है/१/
सभी चेहरे मिले सहमे दिलों में डर समाया है
खुदा कैसा समय आया भला ये क्या इशारा है/२/
नजर से शर्म का पानी नदारद है सभी के अब
मिटी संवेदनाएं अब सभी को स्वार्थ प्यारा है/३/
समर्पण त्याग अब बीते दिनों की बात है साहब
बहस इस बात पर है आज क्या मेरा तुम्हारा है/४/
खुशी के दौर में अब कौन ईश्वर को सुमरता है
मुसीबत के समय ही आदमी ईश्वर पुकारा है/५/
बदल जाता समय को देखकर इंसान ही अक्सर
न जब रस्ता दिखे कोई तो ईश्वर ही सहारा है/६/
No comments:
Post a Comment