221 2122 221 2122
क्या हम बताएँ क्या है रिश्तों का टूट जाना
अपना ही जानता है अपनो का टूट जाना/1/
जिसने है जाग कर के रातें कई गुजारी
उसको पता है क्या है ख्वाबों का टूट जाना/2/
अपनो से लड़ते लड़ते जो खाक हो गया है
उसको पता है क्या है सांसों का टूट जाना/3/
हर भूख बेबसी के मुद्दे हुए नदारद
अच्छा नही है छप्पर चुल्हो का टूट जाना/4/
किस तौर हम मुनासिब इसको कहें बताओ
मुर्दों की बस्तियों में जिंदो का टूट जाना/5/
मंडरा रहे परिंदे मायूस आसमाँ पर
बेघर जो कर गया है पेड़ों का टूट जाना/6/
तरसा जो एक कतरे खातिर वो जानता है
उम्मीद हसरतों का वादों का टूट जाना/7/
होता न मुफलिसों की अब आह में असर कुछ
अच्छा न रब यूँ तेरे बंदो का टूट जाना/8/
कुछ तो कमी रही है अपनी भी कोशिशों में
वरना सहल नही है सपनों का टूट जाना /9/
किस्मत को कोसते ही हम रह गये हमेशा
था अपने हाथ ही उम्मीदों का टूट जाना /10/
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