Monday, 28 December 2020

मैं कोई गुजरा हुआ लम्हा नही हूँ

2122 2122 2122
मैं  कोई   गुजरा  हुआ   लम्हा   नही हूँ
हूँ   हकीकत   मैं  कोई   धोखा  नही हूँ

कशमकश जद्दोजहद कुछ इस कदर हैं 
अब तो अक्सर  खुद में मैं होता नही हूँ

खूब  गुजरी  है  तेरे  बिन  जिंदगी अब
किसने तुझसे कह दिया अच्छा नही हूँ

यूँ  तो  तेरे  बाद भी  खोया  बहुत कुछ
पर  तुझे  रोकर  मैं  फिर  रोया नही हूँ

रोक बस  पाता नही  जज्बात दिल के
दर्द  यूँ  जाहिर  कभी   करता  नही हूँ

बस वफा और सादगी  मुझमें मिलेगी
मैं  कोई  जरिया  कोई  मौका  नही हूँ

तुमने जो ढूंढा न था  अफसोस मुझमें
मैं  दिखावे  से  भरा   रूतबा   नही हूँ

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