2122 2122 2122
मैं कोई गुजरा हुआ लम्हा नही हूँ
हूँ हकीकत मैं कोई धोखा नही हूँ
कशमकश जद्दोजहद कुछ इस कदर हैं
अब तो अक्सर खुद में मैं होता नही हूँ
खूब गुजरी है तेरे बिन जिंदगी अब
किसने तुझसे कह दिया अच्छा नही हूँ
यूँ तो तेरे बाद भी खोया बहुत कुछ
पर तुझे रोकर मैं फिर रोया नही हूँ
रोक बस पाता नही जज्बात दिल के
दर्द यूँ जाहिर कभी करता नही हूँ
बस वफा और सादगी मुझमें मिलेगी
मैं कोई जरिया कोई मौका नही हूँ
तुमने जो ढूंढा न था अफसोस मुझमें
मैं दिखावे से भरा रूतबा नही हूँ
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