2122 2122 2122 212
कसमसाहट ,तिलमिलाहट बेबसी देखी गई
दर्द में लिपटी हुई हर जिंदगी देखी गई
रोज ही सूरज निकलता है अँधेरा है मगर
ओंठ पर सबके उधारी की खुशी देखी गई
आज सबके बीच पसरा एक सन्नाटा बड़ा
आज हर इक आँख में लाचारगी देखी गई
सर गिरे सजदे में हैं पर दिल में है बदमाशियाँ
इस तरह की अब इबादत , बंदगी देखी गई
शहर है झीलों का पंछी प्यास से मरते मगर
सब दिलों में इक अजब सी तिश्नगी देखी गई
दिल जिगर अपना नही है जान भी अपनी नही
और दूजे ठाँव में अपनी खुशी देखी गई
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