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वाकिफ़ है खूब बढ़िया वो जज्बात से मेरे
रहता है पर डरा सा सवालात से मेरे/1/
यूँ जिंदगी में मुश्किलें भी कोई कम नही
देता है बढ़ के और वो औकात से मेरे/2/
लम्हा कहीं पे वक़्त से गिरकर के खो गया
सदमा जुदा नही है ये जुल्मात से मेरे/3/
इक आरजू खयाल तमन्ना तलब है तू
वाक़िफ़ तमाम शहर है माम्लात से मेरे/4/
शिकवा कोई न गम न गिला ही कोई रहा
आंसू भी आशना है बहुत जात से मेरे/5/
इक दिन तो जी के देख मुआफिक मेरे कभी
तू भी कभी हो रूबरू हालात से मेरे/6/
किरदार हर घड़ी यूँ न बदला करो हुज़ूर
रहने दो कुछ तो खुद में निशानात से मेरे/7/
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