Monday, 28 December 2020

मजा बोलिए क्या है इन नफरतों में

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मजा   बोलिए    क्या  है  इन नफरतों में
धरा  क्या  है  कुछ  भी दिली फासलों में/1/

जहाँ  में    मुहब्बत     लुटाते चलो  बस
अजी   गौर    मत    किजिए बातिलों में/2/

उसे   ही    मिले   है    सदा  रंजो गम ये
सहेजा  है   रिश्तों  को   जिसने दिलों में/3/

दिया  रब  ने  फुर्सत  से  फुर्सत के लम्हे
हर इक आदमी  फिर  भी है उलझनों में/4/

सरेआम   ही    लूट    सी    अब मची है
नही  फर्क   कुछ   शाह और रहजनों में/5/

है  गिनती  के   बेशक  मेरे  यार लेकिन
पर  है   खूब       जिंदादिली   दोस्तों में/6/

वफाओं  में   मैने   कमी  कुछ नही  की
मुरव्वत   उन्होंने    न   की   आंसूओं में/7/

न  सह  पाओगे  दर्द  कह कर सितमगर
किया  नाम  शामिल   मेरा  बुजदिलों में/8/

जरूरी  है  दौलत  भी  जीने के  खातिर
नही   पेट   भरता   है   बस   वायदों में/9/

जहाँ    कोई    उम्मीद    होती   नही है
वहाँ  भी   मुझे   रब   मिला  पत्थरो में/10/

बही  जा  रही आंखें अम्मा की अविरल 
है  हलचल  बहुत  इन दिनों  सरहदों में/11/

वही  वहशियाना   नया   क्या   हुआ है
बस इक नाम और जुड़ गया है दुखों में/12/

हमी  पे  बरसने  लगे  अब  वो   पत्थर
अता  की  जिन्हें  धड़कनें   वलवलों में/13/

है  शामिल  मेरा  भी लहू इस जमीं पर 
न  गिनती  करो   तुम  मेरी  दुश्मनों में/14/

हर इक जिंदगी में बहुत सी है  उलझन
रहा  कौन  बाकी  है  इन   मुश्किलों में/15/

मियां   आपकी   हुक्मरानी   है   बेजा
गिना सकते  उपलब्धियां  उंगलियों में/16/

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