12122 12122 12122 12122
सुकून के पल दो पल गरज थी ये फुरसतों का भला करें क्या
नसीब ही अपना जब है सोया दवा करें क्या दुआ करें क्या
तमाम रिश्ते बदलते देखे हैं वक़्त के साथ साथ हमने
करे जो मतलब से नातेदारी भला बताओ वफा करें क्या
लो सज गए फिर से हसरतों के लुभाते बाजार हर कदम पर
विवश हैं बच्चे की जिद के आगे कोई बताए मना करें क्या
बड़ी सी बिंदी सजा के माथे पे रात कैसी निखर रही है
उधार की रोशनी में इतरा रहा गजब चांद का करें क्या
ये कच्चे रिश्ते, ये बासी चाहत, ये अपनापन,है लगे अधूरा
हमारे हिस्से में ये ही सौगात आई अक्सर बता करें क्या
न दायरों में समेट सकते हो मेरा किरदार है अजूबा
है एक पल में खिला ये चेहरा औ दूसरे पल बुझा करें क्या
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