Monday, 28 December 2020

सुकून के पल दो पल गरज थी ये फुरसतों का भला करें क्या

12122 12122 12122 12122
सुकून के पल दो पल गरज थी ये फुरसतों का भला करें क्या
नसीब ही  अपना  जब है सोया  दवा करें क्या दुआ करें क्या

तमाम  रिश्ते   बदलते  देखे  हैं   वक़्त  के  साथ साथ  हमने
करे जो  मतलब से  नातेदारी  भला  बताओ  वफा  करें क्या

लो सज गए फिर से हसरतों के लुभाते बाजार हर कदम पर
विवश हैं बच्चे की जिद के आगे  कोई बताए  मना करें क्या

बड़ी सी  बिंदी  सजा के  माथे पे  रात  कैसी  निखर  रही है
उधार की  रोशनी में  इतरा  रहा  गजब  चांद  का  करें क्या

ये कच्चे रिश्ते,  ये बासी चाहत,  ये अपनापन,है लगे अधूरा 
हमारे  हिस्से  में  ये  ही  सौगात आई  अक्सर बता करें क्या

न  दायरों  में   समेट  सकते  हो   मेरा  किरदार  है  अजूबा 
है एक पल में खिला ये चेहरा  औ दूसरे पल बुझा करें क्या

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