Monday, 28 December 2020

फुरसतों में उम्र भर यूँ ही गुजर होगी नही

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फुरसतों  में   उम्र  भर   यूँ  ही   गुजर  होगी नही
कुछ  किये   बिन  जिंदगी  ऐसे  बसर  होगी नही/१/

स्याह  रातों  से  भला  कब तक डरें तुम ही कहो
रात  ये  कब तक  रहेगी  क्या  सहर  होगी  नही/२/

कशमकश  जद्दोजहद  में  ही  गुजारे कब तलक 
ऐसे  तो   कोई  समस्या    मुख्तसर    होगी  नही/३/

मुश्किलों  से  भागता   कब तक  फिरेगा आदमी
आंख   मिचने  से   हकीकत  से मुकर होगी नही/४/

करता  जाता  है  गुनाहों  पर  गुनाह हर आदमी
सोचता  है  क्या  भला  रब  को खबर होगी नही/५/

चांद  तारों  के  खयालो  से  निकलिए भी  कभी
इन  मुअल्लो  से इतर  क्या  रह गुजर होगी नही/६/

है  परेशां  क्या  हुआ  जमहूर  की फितरत है ये
हुक्मरां  है   मुब्तिला  उसको  खबर  होगी नही/७/

सोचकर तो देखिये कुछ पल कभी उनको मियां
रात  ही  है  जिनके  हिस्से  में  सहर   होगी नही/८/

हाल  मत  पूछा  करो  हर  रोज  मेरा  यूँ  हुज़ूर
इस  तरह   कोई   दराज़े  तो  उमर   होगी  नही/९/

स्याह रातों से भला  कब तक लड़े  जुगनू कोई
जब तलक  सूरज  न आएगा  सहर  होगी नही/१०/

धर्म  है    इंसानियत     मेरी    यही  पहचान है
चंद  फिरको  सिरफिरो  की ये नजर होगी नही/११/

माँ   लगा  देती   डिठौना   रोज  माथे  पर  मेरे
क्या  करेगी  अब  बला  कैसे  महर  होगी नही/१२/

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