2122 2122 2122 212
फुरसतों में उम्र भर यूँ ही गुजर होगी नही
कुछ किये बिन जिंदगी ऐसे बसर होगी नही/१/
स्याह रातों से भला कब तक डरें तुम ही कहो
रात ये कब तक रहेगी क्या सहर होगी नही/२/
कशमकश जद्दोजहद में ही गुजारे कब तलक
ऐसे तो कोई समस्या मुख्तसर होगी नही/३/
मुश्किलों से भागता कब तक फिरेगा आदमी
आंख मिचने से हकीकत से मुकर होगी नही/४/
करता जाता है गुनाहों पर गुनाह हर आदमी
सोचता है क्या भला रब को खबर होगी नही/५/
चांद तारों के खयालो से निकलिए भी कभी
इन मुअल्लो से इतर क्या रह गुजर होगी नही/६/
है परेशां क्या हुआ जमहूर की फितरत है ये
हुक्मरां है मुब्तिला उसको खबर होगी नही/७/
सोचकर तो देखिये कुछ पल कभी उनको मियां
रात ही है जिनके हिस्से में सहर होगी नही/८/
हाल मत पूछा करो हर रोज मेरा यूँ हुज़ूर
इस तरह कोई दराज़े तो उमर होगी नही/९/
स्याह रातों से भला कब तक लड़े जुगनू कोई
जब तलक सूरज न आएगा सहर होगी नही/१०/
धर्म है इंसानियत मेरी यही पहचान है
चंद फिरको सिरफिरो की ये नजर होगी नही/११/
माँ लगा देती डिठौना रोज माथे पर मेरे
क्या करेगी अब बला कैसे महर होगी नही/१२/
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