Monday, 28 December 2020

जाम उल्फत के जरा मुझको पिला दो कोई

2122 1122 1122 22 
जाम  उल्फत  के  जरा  मुझको पिला दो कोई
इक नजर   देख  लो   ये प्यास  मिटा  दो कोई/1/

खूब  तरसा  हूँ  मैं    ताउम्र    मुहब्बत के लिए
कुछ हंसी ख्वाब इन आंखों को दिखा दो कोई/2/

अब  तो  बाजार  में  बिकते  हैं  मुखौटे ज्यादा
आईना    बेचने  वाले    को    बता    दो  कोई/3/

अब  खरीदार  नही  मिलते  कहीं  भी  सच के 
झूठ  का  फिर   बड़ा  बाजार   लगा  दो कोई/4/

मूंगफली  आए  नयी  जितनी  भी  बाजारों में
सस्ते   होते   नही   बादाम   दिखा   दो   कोई/5/

फिर तो औलाद भी देती है अलहदा सा सबक
कुछ जियादा  जरा जी कर तो  दिखा दो कोई/6/

मौके  ईमान  के   दुश्मन   की   तरह   होते हैं
इस  नये  दौर  को   ये  बात   सुना  दो   कोई/7/

फिर से गुलजार हो गुलशन मेरा  खुश्बू बिखरे
नफरतें  दिल  से  यहाँ  सबके  मिटा  दो कोई/8/

खुद  अंधेरे  में   है  वो  सबको  उजाले  देकर
इक  दिया  दीप  तले  भी  तो  जला  दो कोई/9/

इस जहां आने से अब  बेटियाँ  कतराने  लगी
खौफ़  ये  उनके  दिलों  से  तो  हटा  दो कोई/10/

रिश्तों को खास  बना  देती है  हद से  ज्यादा
एक   छोटी  सी  ही  परवाह  जता   दो  कोई/11/

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