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इंसानियत से बढ़ के खसारा कोई नही
इस राह रंजो गम है नजारा कोई नही/1/
जद्दोजहद यूँ चाहे तू जितनी भी कर मियां
रहमो करम बगैर गुजारा कोई नही/2/
गिरते रहे संभलते रहे अपने आप हम
हम जैसा तो नसीब का मारा कोई नही/3/
जुगनू तलाश करते रहे हम उजालों में
इस वास्ते भले ही इजारा कोई नही/4/
आंखों में सहमे सहमे से मंजर ठहर गये
बोझिल थे ख्वाब फिर भी उतारा कोई नही/5/
फिर फुरसतों की आंच में मुद्दे पिघल गये
राहत सुकून चैन इशारा कोई नही /6/
मौका मिला जिसे भी निचोड़ा है शौक से
दुनिया में मुफलिसी का सहारा कोई नही /7/
भीतर से घात पर है तो बाहर से यार है
हर शख़्स पर यकीन खुदारा कोई नही/8/
हर आदमी है सोच से ज्यादा ही होशियार
अब आजकल कहीं भी बिचारा कोई नही/9/
इजारा - ठेका पट्टा लाइसेंस
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