Monday, 28 December 2020

इंसानियत से बढ़ के खसारा कोई नही

221 2121 1221 212 
इंसानियत   से   बढ़ के   खसारा   कोई नही
इस  राह    रंजो गम  है   नजारा   कोई नही/1/

जद्दोजहद  यूँ  चाहे तू जितनी भी कर मियां
रहमो  करम     बगैर    गुजारा    कोई  नही/2/

गिरते  रहे   संभलते  रहे   अपने  आप हम
हम  जैसा   तो  नसीब  का  मारा कोई नही/3/

जुगनू   तलाश   करते  रहे  हम  उजालों में
इस  वास्ते    भले  ही    इजारा    कोई नही/4/

आंखों  में  सहमे सहमे  से  मंजर ठहर गये 
बोझिल थे ख्वाब फिर भी उतारा कोई नही/5/

फिर  फुरसतों की  आंच में मुद्दे पिघल गये
राहत    सुकून    चैन    इशारा   कोई  नही /6/

मौका  मिला  जिसे भी निचोड़ा है शौक से 
दुनिया में  मुफलिसी  का सहारा कोई नही /7/

भीतर से  घात  पर  है  तो बाहर से यार है
हर  शख़्स  पर  यकीन  खुदारा कोई नही/8/

हर आदमी है सोच से ज्यादा ही होशियार
अब आजकल कहीं भी बिचारा कोई नही/9/

इजारा - ठेका पट्टा लाइसेंस

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