जिंदगी लाचार है औ कुछ नही
थोड़ी सी बेजार है औ कुछ नही
वो तसल्ली, राहतें, सुकून, वो
बस यही उधार है औ कुछ नही
चिंदी चिंदी ख्वाहिशें सब हो गई
नौ ब नौ अगयार है औ कुछ नही
अपने मतलब का सभी ने रख लिया
कल के हम अखबार है औ कुछ नहीं
आज भी मां बाप के संग रहते हैं
अपने ये संस्कार है औ कुछ नहीं
उम्र भर का है असासा बस यही
अपने सर दस्तार है औ कुछ नहीं
कोई मतलब है नही हालात से
नाम की सरकार है औ कुछ नहीं
बाकि तो सब ठीक है मेरे मुल्क में
थोड़े बस गद्दार है औ कुछ नहीं
अश्क निहां है मगर आंखों से ये
दर्द आश्कार है औ कुछ नहीं
No comments:
Post a Comment