Wednesday, 19 September 2018

जिंदगी लाचार है औ कुछ नहीं

जिंदगी    लाचार है   औ कुछ नही
थोड़ी सी   बेजार  है  औ कुछ नही

वो  तसल्ली,    राहतें,   सुकून,  वो
बस यही   उधार है    औ कुछ नही

चिंदी  चिंदी   ख्वाहिशें   सब हो गई
नौ ब नौ  अगयार  है   औ कुछ नही

अपने मतलब का  सभी ने रख लिया
कल के हम अखबार है औ कुछ नहीं

आज भी  मां बाप   के संग  रहते हैं
अपने  ये  संस्कार है  औ  कुछ नहीं

उम्र  भर  का  है असासा   बस यही
अपने  सर  दस्तार है  औ कुछ नहीं

कोई   मतलब  है    नही  हालात से
नाम की  सरकार  है  औ  कुछ नहीं

बाकि तो  सब  ठीक है  मेरे मुल्क में
थोड़े  बस   गद्दार है   औ  कुछ नहीं

अश्क   निहां है   मगर   आंखों से ये
दर्द   आश्कार   है   औ    कुछ नहीं

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