आदतों से जुदा नही होता
वक्त हरदम यक सा नही होता
हादसा आम हो गया होता
साथ मेरे जो दुआ नही होता
वक्त करता वफाई जो हमसे
फासला दरमियां नही होता
दायरों में बंधा रहा हरदम
ख्वाहिशों का जहां नही होता
देखकर दुनिया के रंजो गम
चैन से जीना नही होता
सिलसिला थमता ही नहीं है अब
मुश्किलों का ढोना नही होता
क्या इसी को है जिंदगी कहते
टूटे मन से जीना नही होता
मसखरा बस रह गया हूँ मैं
रोज अब कहकहां नही होता
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