Sunday, 16 September 2018

दर्द सीने का बयां हो जाएगा

दर्द सीने का बयां हो जाएगा
मामला ये जुर्म का हो जाएगा

जो कभी हम बोलने पे आ गए
जो सुनेगा हकबका हो जाएगा

बोलना भी है जरुरी सा कभी
दर्द दब के घाव सा हो जाएगा

कोई जब राजी नहीं हो सुनने
हादसा भी देखना हो जाएगा

चीखती है जिंदगी तो क्या हुआ
शोर ये सब ही धुंआ हो जाएगा

मुश्किलें तो हर कदम पे है खड़ी
उनपे भारी हौसला हो जाएगा

चांद पिघलता रहा कतरा कतरा
रात भर में वो फना हो जाएगा

आंच पर है जिंदगी की हसरतें
ख्वाब झुलसा झुलसा हो जाएगा

दोस्त बेशक बा वफा बन जाए भी
बेहतर हम सा कहाँ हो पाएगा

मुश्किलों में जिंदगी जो जी गया
जीना मरना साथ का हो जाएगा

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