क्या होता है क्या नही होता
इश्क में बस वफा नही होता
लोग अपनी गरज से है मिलते
कोई ऐसे सगा नही होता
इश्क की दुनिया ये कैसी है
जिक्र वफाओं का नही होता
चांद छिपा है बादलों पीछे
रात वो बरहना नही होता
वक्त से जब भी सामना हुआ
क्यूँ कभी ये सगा नही होता
क्या इसी को है जिंदगी कहते
सांस चलती पता नहीं होता
हो गयें हैं हादसे इतने
अब ये लगता नया नहीं होता
सिसकियाँ ही सिसकियाँ है
कहकशां बारहा नही होता
सामना मुश्किलों से होता है
रोज मरना ऐसा नहीं होता
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