Monday, 10 September 2018

क्या होता है क्या नही होता

क्या होता है क्या नही होता
इश्क में बस वफा नही होता

लोग अपनी गरज से है मिलते
कोई ऐसे सगा नही होता

इश्क की दुनिया ये कैसी है
जिक्र वफाओं का नही होता

चांद छिपा है बादलों पीछे
रात वो बरहना नही होता

वक्त से जब भी सामना हुआ
क्यूँ कभी ये सगा नही होता

क्या इसी को है जिंदगी कहते
सांस चलती पता नहीं होता

हो गयें हैं हादसे इतने
अब ये लगता नया नहीं होता

सिसकियाँ ही सिसकियाँ है
कहकशां बारहा नही होता

सामना मुश्किलों से होता है
रोज मरना ऐसा नहीं होता

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