लहजा, मिजाज, नाज, नजरिया बदल गया
महफिल में हमको देखा तो चर्चा बदल गया
जाने क्या सोंच कर के वो नजरें झुका लिये
अपनो की भीड़ में कोई"अपना" बदल गया
तेरे शहर में अपने भी यूं तो थे "मोतबर"
तुमसे हुई जो "उल्फत" भरोसा बदल गया
सुब्ह जो थे "हबीब" हुई "शाम" खो गये
बदलते ही "वक्त"के सभी रिश्ता बदल गया
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